Dashehra ,दशहरा क्यों मनाया जाता है।क्या है इसका मान्यता है। जाने विस्तार से।

दशहरा हिंदुओ का प्रमुख त्यौहार है दशहरा नवरात्रि के 10वे दिन मनाया जाता है ।इस दिन भगवान राम ने रावण का वध किया था और बुराई पर अच्छाई की जीत दिलाई थी इस त्यौहार का संबंध भगवान राम से जुड़ा हुआ माना जाता है कई लोग तो ये भी बताते है कि इस दिन मां दुर्गा ने महिषासुर का वध की था इस लिए भी दशहरा मनाया जाता है कितने आदमी इस त्यौहार को विजय दशमी के नाम से भी जानते है

दशहरा,

दशहरा किस का प्रतीक माना गया है

दशहरे को बुराई पर अच्छाई का प्रतीक माना गया है। रामायण के अनुसार जब माता सीता को लंका के राजा रावण हर के ले गया था उसके बाद राम ने सीता को छुड़ाने के लिए रावण से युद्ध किया और रावण का वध किया था। दशहरा के दिन रावण के साथ साथ कुंभकर्ण,मेघनाथ का पुतला बनाकर जलाया जाता है इस त्यौहार का हिंदू धर्म में बहुत महत्व है इस त्यौहार से हमे सिख मिलती है कि हमे अपने शक्ति पर घमंड नहीं करनी चाहिए।इस साल दशहरा 24 अक्टूबर को मनाया जायेगा। दशहरा के दिन रामलीला का आयोजन भी किया जाता है। राम जी का जुलूस निकाल कर दशहरा मैदान तक ले जाया जाता है वहा पर राम ,लक्ष्मण जी का पूजा किया जाता है।राम,लक्ष्मण हाथो में धनुष बाण दिया जाता है और राम,लक्ष्मण रावण के साथ साथ मेघनाथ,कुंभकर्ण के बने पुतलो पर तीर चलाते है और रावण का वध करते है

इन जगहों पर नही जलता रावण पुतला।

जैसा की हम सब जानते है की भारत में हर जगह रावण का पुतला जलाया जाता है मगर ऐसा भी जगह है जहां रावण का पुतला नही जलाया जाता है बल्कि पूजा की जाती है यूपी में एक छोटा सा गांव है जिसका नाम बिसरख है यह के लोगो का मानना है की यह पर रावण का जन्म हुआ था और रावण को पूर्वज मानते है इस लिए यह रावण की पूजा की जाती है। एसा ही एक और जगह है जिसका नाम है कांगरा यह के लोगो का मानना है कोरा यह पर भगवान शिव की आराधना के उनसे वरदान प्राप्त किया था भगवान शिव का बहुत बड़ा भक्त होने के चलते रावण की पूजा करते है लोग यह । मंडोर में भी रावण का पुतला नही जलाया जाता है यह के लोगो का मानना है यह पर रावण मंदोदरी से विवाह की थी इस गांव के लोग रावण को दामाद मानते है इसलिए रावण की पुतला नही जलाते है यह के लोग

मां दुर्गा ने क्यों की महिषासुर का वध ।

महिषासुर एक बहुत बड़ा असुर था वह अनार्यो का राजा था महिषासुर के पास बहुत शक्ति था पुराणों के अनुसार महिषासुर भगवान ब्रह्मामा की घोर तपस्या कर के यह वरदान मांग लिया की उसे पृथ्वी पर कोई मार नही सके इस वरदान को पा कर महिषासुर बहुत घमंडी हो गया और चारो तरफ उत्पाद मचाने लगा। किसी भी ऋषि मुनि को पूजा नही करने देता था जो ऋषि मुनि भगवान की पूजा अर्चना करते उनको कैद कर लेता था।महिषासुर को मिले वरदान और पराक्रम के चलते देवी देवता उसके सामने नजर नहीं आते थे। तभी ब्रह्ममा , विष्णु,महेश ने मां दुर्गा का सृजन किया ।मां दुर्गा और महिषासुर की लड़ाई 9 दिनों तक होती रही और 10वे दिन दुर्गा ने महिषासुर का वध कर दिया

दशहरा के दिन हनुमामन जी की पूजा क्यों करनी चाहिए

दशहरा के दिन्हानुमान जी की पूजा अर्चना करनी चाहिए।इसे बहुत शुभ माना जाता है पूजा में पान के पते लेकर जाए और हनुमान जी को चढ़ाए ।बूंदी की लड्डू का भोग लगाना चाहिए और लांघोट पहनाए। इसे हमारे सभी कार्य सफल होंगे और दुख दूर होंगे।हनुमान जी राम जी के बहुत बड़े भक्त है हनुमान जी को हरेक मंगलवार के दिन पूजा करनी चाहिए इसे हमारे बिगड़े काम बन जायेंगे।

2023 दशहरा मुहूर्त

2023 दशहरा मुहूर्त इस साल दशहरा 23 अक्टूबर साम 5 बजकर 44 मिनट पर होगी।और खतम 24 अक्टूबर 3 बजकर14 मिनट पर होगी दशहरा के दिन अस्त्र शस्त्र का भी पूजा विधि किया जाता है। विजयदशमी के दिन शस्त्र पूजा विजय मुहुत्रे करनी चाहिए।24 अक्टूबर को ही विजय मुहूर्त 1 बजकर 46 मिनट से लेकर 2 बजकर31 मिनट तक रहेगी।

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